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कभी नहीं मिली थी चपरासी की नौकरी, लगातार चार बार UPSC में हुए सफल फिर बने आईएएस अफसर।

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कहानी ऐसे युवा की जिन्हें कभी चपरासी की नौकरी केवल इस बात से नहीं दी गई थी क्योंकि उसे कम सुनाई देता था। मगर इस युवा ने दृढ़ निश्चय और काबिलियत के बलबूते सफलता की बुलंदियों पर अपना नाम हासिल किया है। हरियाणा के पलवल जिले के डीसी रहे मनीराम शर्मा की कहानी यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है।

मनीराम राजस्थान के अलवर जिले के छोटे से कस्बे से आते हैं। पिता मजदूरी कर परिवार का खर्च वहन करते थे और मां दृष्टिहीन थी। मनीराम को खुद कान से सुनाई नहीं देता था। गांव में कोई स्कूल नहीं थी लिहाजा पढ़ने के लिए 5 किलोमीटर पैदल जाना होता था। मनीराम ने 12वीं तक की पढ़ाई इसी स्कूल से कंप्लीट की। पढ़ाई में शुरू से ही होनहार छात्र मनीराम ने 12वीं और 10वीं में टॉप किया। परिवार की माली हालात को देखते हुए पिता ने मनीराम को नौकरी दिलाने के लिए बीडीओ के पास गए जहां उन्हें चपरासी की नौकरी देने से भी उन्हें इंकार कर दिया।‌

मनीराम ने उसी वक्त ठान लिया कि मैं पढ़ कर एक काबिल पदाधिकारी बनूंगा। फिर मनीराम ने आगे की पढ़ाई के लिए अलवर का रुख किया। पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। मनीराम राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन का एग्जाम क्लियर कर चुके थे। क्लर्क की नौकरी उन्होंने छोड़ दी थी। विश्वविद्यालय में टॉप करने के बाद लेक्चरर भी बन गए थे। साल 2005, 2006, 2007 में यूपीएससी क्लियर करने के बाद भी उनका चयन नहीं हो पाया। फिर कान का ऑपरेशन कराया फिर 2009 में यूपीएससी की परीक्षा दी और आईएएस अधिकारी बनकर लोगों के लिए प्रेरणा बन गए।

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