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संगीता कई असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार, 10वीं रैंक के साथ UPSC क्रैक कर बनीं टॉपर।

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ओडिशा की संजीता माहापात्रा की UPSC का सफर काफी लंबी रही है। लेकिन संजीता हार नहीं मानी। बहुत से लोगों को लगने लगा था कि यह सफर कुछ अधिक ही लंबा हो रहा है पर संजीता को पता था कि वे क्या चाहती हैं और जो वे चाहती हैं वह इतनी सरलता से नहीं मिलेगा। संजीता का जन्म व शुरुआती शिक्षा राउरकेला में ही हुई। फिर वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में अच्छी थी। बीटेक के बाद संजीता सरकारी नौकरी करने लगी जो प्रतिष्ठित और पैसा भी था। हालांकि कुछ वर्ष नौकरी की लेकिन तभी उनके मन में बचपन का अपना IAS बनने का सपना उछाल मार रहा था। दरअसल वह IAS बनना चाहती थी। संजीता एक इंटरव्यू में बताती हैं कि कॉलेज खत्म होने बाद वह 3 बार प्रयास की, लेकिन वह बिलकुल बेकार गया।

क्योंकि उस वक्त उनकी तैयारी अच्छी नहीं थी। तीनों ही अटेम्पट्स में वह प्री भी क्लियर नहीं की थी। उसके बाद वे नौकरी करने लगी और इस दौरान परीक्षा का पैटर्न समझकर तैयारी में लगी रहीं पर उन्होंने अटेम्पट्स नहीं दिए। चूंकि उनके शहर में उन्हें ठीक से गाइडेंस नहीं मिल पा रहा था इसलिए वे इंटरनेट का ही सहारा लिया। एक समय के बाद उन्हें लगा कि नौकरी के साथ तैयारी संभव नहीं है और नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। इसी बीच उनकी शादी भी हो गई। आखिरकार उन्होंने अपनी लगी लगाई नौकरी छोड़ दी। अब संजीता पूरी तरह से तैयारी में लग गईं। यह वक्त संजीता के लिए बहुत कठिन था जब चौथे प्रयास में भी उनका सेलेक्शन नहीं हुआ। लेकिन संजीता हार नहीं मानी और ससुराल वालों ने भी साथ दिया और वे फिर से तैयारी में लग गई।

वर्ष 2019 में उनका 5वां अटेम्पट था जिसमें वे अंततः सफल हुईं। संजीता बताती हैं कि इस बार उम्मीद थी की सफल हो जाऊंगी पर रैंक 10 आएगी यह कभी नहीं सोचा था। उनके लिए यह किसी सरप्राइज जैसा था। संजीता अपनी मुख्य व बेसिक तैयारी NCERT के बुक से की है। साथ ही उन्होंने न्यूज पेपर पढ़ना और NCERT की किताबों को पढ़ना काफी पहले शुरू कर दिया था। संजीता ने अपना ऑप्शनल सोशियोलॉजी चुना क्योंकि उन्हें यह पसंद था। इसके थॉरो के लिए उन्होंने कुछ दिन कोचिंग भी ली बाकी सेल्फ स्टडी से ही तैयारी की। 2018 और 2019 के अटेम्पट में वह कुछ दिन दिल्ली में रहकर टेस्ट सीरीज ज्वॉइन की थी।

लगभग 3 महीने एक बिना खिड़की के कमरे में अकेले रहना और खाने में बस कुछ भी हल्का खा लेना उनके रूटीन था।ऐसे संजीता ने मॉक टेस्ट दिए, टेस्ट सीरीज ज्वॉइन की और मॉक इंटरव्यू भी दिये। संजीता कहती हैं कि यह सफर काफी लंबी होती है और यहां अंत में कोई साथ नहीं बचता सिवाय अपने-आपके। इसलिए खुद को खुद ही मोटिवेट करे। आपको पता होता है कि यह कठिन परीक्षा है तो जाहिर है कि सफलता भी आसानी से नहीं मिलेगी। जब राह में मुश्किलें आएं या सफलता मिलने में देर लगे तो हिम्मत न हारें, इसे सफर का ही एक हिस्सा माने। संजीता ने आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस, ऐस्से व एथिक्स के पेपर को बराबर महत्व, मॉक पेपर, मॉक इंटरव्यू देकर व खुद पर पूरा भरोसा रखकर सफलता हासिल की है।